अमरावती.
दिनांक ७(प्रीती पडोळे)
समाजसेवा केवल आर्थिक मदद करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों के मन में अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच और सेवा की भावना पैदा करना भी समाजसेवा का ही एक महत्वपूर्ण रूप है. इसी सोच को साकार करते हुए भगवान हनुमान के अनन्य भक्त, सेवाभावी और उद्यमी विजय खंडेलवाल ने शनिवार, ५सितंबर को गरीब बच्चों के लिए एक अनूठी पहल की.
विजय खंडेलवाल ने सरोज टॉकीज में करीब ६० गरीब बच्चों के लिए हनुमान अंश फिल्म देखने की व्यवस्था की. दोपहर 3 से शाम ६ छंबजे के शो में बच्चों ने भगवान हनुमान के परम भक्त और भगवान हनुमान के अवतार के रूप में पहचान रखनेवाले नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म देखी. बच्चों के लिए यह केवल मनोरंजन का अवसर नहीं था, बल्कि भगवान हनुमान की भक्ति, सेवा और समर्पण की भावना को करीब से समझने का अवसर भी बना.
पर्दे पर देखी हनुमान भक्ति की प्रेरणादायी गाथा
फिल्म के माध्यम से बच्चों ने नीम करोली बाबा के जीवन और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अनन्य श्रद्धा को जाना. हनुमान भक्ति से जुड़ी प्रेरणादायी घटनाओं को देखकर बच्चों के मन में भी भक्ति और अच्छे विचारों के बीज पड़ने की उम्मीद है.
विजय खंडेलवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों को फिल्म दिखाना नहीं, बल्कि उनके मन में भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा और श्रीराम के प्रति समर्पण की भावना जागृत करना है. उन्होंने कहा कि यदि बच्चों के भीतर भगवान हनुमान जैसा तेज, साहस, सेवा भावना और श्रीराम जैसी भक्ति की भावना पैदा होती है, तो इससे बढ़कर उनके लिए और कुछ नहीं हो सकता.
भक्ति के साथ संस्कारों का संदेश
बच्चों का मन बेहद कोमल होता है. बचपन में देखी और सुनी गई प्रेरणादायी बातें उनके व्यक्तित्व पर लंबे समय तक प्रभाव डालती हैं. ऐसे में भगवान हनुमान के जीवन से जुड़े आदर्श-साहस, निष्ठा, विनम्रता, सेवा, अनुशासन और समर्पण- बच्चों के भीतर अच्छे संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
नीम करोली बाबा की जीवनगाथा के माध्यम से बच्चों को यह संदेश भी मिलता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा और मानवता के प्रति समर्पण में भी उसका वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है.
समाजसेवियों के लिए भी प्रेरणा
विजय खंडेलवाल की यह पहल अन्य समाजसेवियों के लिए भी एक सीख है. समाज के जरूरतमंद बच्चों को केवल आर्थिक सहायता देना ही जरूरी नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञान, संस्कार, प्रेरणा और सकारात्मक सोच से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
यदि समाज के सक्षम लोग अपने संसाधनों का थोड़ा सा हिस्सा बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके भीतर अच्छे विचारों को विकसित करने में लगाएं, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है.
विजय खंडेलवाल ने जिस तरह गरीब बच्चों को हनुमान भक्ति से जोड़ने का प्रयास किया, वह इस बात का उदाहरण है कि समाजसेवा का एक छोटा सा प्रयास भी किसी बच्चे के मन में बड़े और अच्छे सपनों को जन्म दे सकता है. बच्चों के चेहरे पर खुशी और मन में भक्ति की लौ जगाने वाली यह पहल निश्चित रूप से अनुकरणीय है l